Sunday, May 1, 2022

एक छुपा हुआ सच

इस संसार मे दो शाश्वत नियंम है जो पहले भी थे,आज भी हैं और जब तक यह
संसार रहेगा तब तक रहेंगे| इन नियमो को ईश्वर भी अमान्य नहीं कर सकते हैं|
हम इंन नियमो से उत्पन्न परिणामों से निजात पाने के लिए तमाम प्रकार के भजन
पूजन, व्रत और उपवास करके भगवान की शरण मे खुद को समर्पित कर देने की  
कोशिश करते है मगर नतीजा विफल रहता है और मन की संतुष्टि समझकर खुद  
को शांत्वना और सहारा देते रहते है जबकि इन परिस्थितियों का मुकाबला करने
के लिए कोई दूसरा रास्ता या विकल् खोजने का प्रयास नहीं करतेहै| इस विषय  
मे मेरे मन मे कुछ विचार आया है जो इस प्रकार है ;-
 
इस संसार में दो नियम अपरिवर्तनीय है|
 
1) यह संसार अनिश्चित है और
2) इस संसार मे बहुत सी घटनाएँ आकस्मिक रूप से घटित होती है |
 
इन्हीं दोनों कारण से उत्पन्न नतीजे के सामने मानव सबसे बेबस और असहाय
है, फलतः भयभीत भी है| हम क्या करें यह यक्ष॑ प्रश्न निरंतर हमारे मष्तिस्क
को परेशान करता रहता है| इससे मुकाबला करने हेतु हमें दो कार्य करना चाहिए|
 
1) हम तन, मन, धन से तैयार रहें
2) कोई घटना आकस्मिक रूप से घटने से पहले ही हम उसके लिए सतर्क रहें |
 
इस संसार मे एक और नियम सदैव चलता है यथा जहाँ पर श्रृष्टि है वहां विनाश है, 
जहाँ आकर्षण है वहां विकर्षण है, जहाँ अँधेरा है वहीं कहीं उजाल्रा है, जहाँ सुख है 
वहां दुःख है और जहाँ निश्चितता है वहीं पर अनिश्चितता भी है| जिस प्रकार मृत्यु निश्चित 
है परन्तु वह कब कहाँ और कैसे होगी यह सब अनिश्चित है|
 
हम सतर्कता और तैयारी बरतने मे किस हद तक कामयाब होंगे यह इस बात
पर निर्भर करेगा कि हम किस सीमा तक तैयार और सतर्क हैं| जब भी हम कोई
यात्रा प्रारंभ करते हैं उस समय लगभग निश्चित रूप से हमजय मा काली या दुर्गा 
का जप करते हैं जिससे, हमें रास्ते मे अचानक कोई विपरीत परिस्थिति का
सामना  करना पड़े | मगर ह्र्म लोग यह खयाल नहीं करते कि दुर्घटना से बचने
के लिए हमारा असली रक्षा कवच या बीज मंत्र रास्ते मे जगह जगह लिखा रहता
है कि
 
सावधानी हटी दुर्घटना घटी” |
 
इसी प्रकार बिना सोचे समझे हम जीवन भर गलत नंबर डायल करते रहते है और
उसका नतीजा शून्य रहता है |
 
अंत मे हम यही कहना चाहेंगे कि तन मन और धन से हमेशा तैयार और सतर्क रहें|
अगर हम कहीं जाने के लिए पूरी तैयारी कर रहें हैं परन्तु घड़ीका ध्यान नहीं रखेंगे
तो गाड़ी समय पर निकल जाएगी और हमारी सारी तैयारी
धरी कि धरी रह जाएगी |
 
“KEEP YOURSELF PREPAIRED AND ALERT WHEN YOU CAN NOT PREDICT”
 
शुभकामनाओ सहित
 
अमरनाथ मुखर्जी ( मोबाइल 979406209 )
 
 

 

Saturday, September 11, 2021

জীবন সূত্রত্রয়ী


(অমর নাথ মুখোপাধ্যায়)

(মো: 9794016209)

 

মরা প্রায় সবাই গাড়ি চড়ে যাওয়া আসা করি বা অনেকেই নিজেই গাড়ি চালাই কিন্তু গাড়ির চলার বেগটি কোথা হতে এল, তার এই চালিকাশক্তির উৎসটি কোথায়, হয়তো নিয়ে অনেকেই সেভাবে চিন্তা ভাবনা করেননি, তাই সে নিয়ে যদি কিছু ভাবনা চিন্তা করা যায় তাহলে কিছু নিষ্কর্ষে পৌঁছন যাবে। যেমন গাড়ির প্রাণশক্তি বা জীবনীশক্তিই হল তার engine(a machine that converts fuel into motion), engine ক্রমাগত petrol/diesel কে নিজের ভেতরে টেনে নিয়ে তাকে চালিকাশক্তিতে রূপান্তরিত করে চলতে থাকে। Petrol নামক বস্তুকে তার রূপান্তরিত করার শক্তির নাম হল তার প্রাণশক্তি বা জীবনীশক্তি। এখন যদি কোন কারনে engine এর জীবনীশক্তির অভাব বা দুর্বল হয়ে পড়ার স্থিতিতে পৌঁছয় তবে গাড়ি কিন্তু এক ইঞ্চিও আগে যেতে পারবেনা যতই তাতে petrol/diesel ঢালা হোক না কেন। Engine তখনই দুর্বল হয়ে যায় যখন তার আনুষাঙ্গিক বস্তুগুলি, যেমন তার Battery, Spark plug, coolant, engine oil, gear oil এগুলির অভাব বা ঠিকমতো কাজ না করায় engine এর fuel থেকে শক্তি রূপান্তর করার ক্ষমতাই সে হারিয়ে ফেলে।

ঠিক সেইভাবেই মানব শরীর শক্তি উৎপাদনের একটি যন্ত্র বিশেষ। আমাদের জন্ম মূহুর্তে আমরা প্রকৃতি প্রদত্ত একটি উপহার পাই যার সাহায্যে মাতৃজঠর থেকে ভূমিষ্ঠ হওয়া মাত্রই আমাদের নিঃশ্বাস নিয়ে মাতৃদুগ্ধ পান করে জীবিত থাকা সম্ভব হয়ে ওঠে কারন পানীয় এবং হাওয়া (oxygen) দ্বারা আমাদের শরীর তার জীবনীশক্তির মাধ্যমে শরীরে কর্মশক্তি প্রদান করতে থাকে যার জন্যে আমাদের নড়াচড়া, হাঁটা চলা, দৌড়ান ইত্যাদি করা সম্ভব হয়। এটি যেন ঠিক বস্তু থেকে শক্তিতে রূপান্তরের মত। যেমন Nuclear reactor থেকে তড়িৎ শক্তি উৎপাদন হয় তেমনই আমাদের শরীরের কোষের মধ্যে অসংখ্য reactor থাকে, চিকিৎসাবিজ্ঞানে যাকে বলা হয় Mitochondria, যেগুলি সদা সর্বদা আমাদের খাদ্য বস্তু আর হাওয়া (oxygen) থেকে কর্মশক্তি যোগান বা জীবিত থাকার শক্তি প্রদান করে চলেছে। জন্মমুহূর্তে আমরা আর একটি উপহার পাই তা হল মা আমাদের স্তন্যপান করিয়ে প্রাথমিক প্রতিরোধী শক্তি (immunity) প্রদান করেন। এর মাধ্যমে আমরা বিভিন্ন রোগ জীবাণুর সঙ্গে লড়াই করার ক্ষমতা লাভ করে থাকি।

আমরা জীবনীশক্তি এবং প্রতিরোধী শক্তি থাকা সত্বেও আমাদের মনে একটি বদ্ধমূল ধারণা নিয়ে সারা জীবন নির্বাহ করে থাকি যে ওষুধ খেলেই আমাদের অসুখ সারবে। বস্তুওঃ ওষুধ খেয়ে অসুখ সারে না। ওষুধের ভূমিকা হল শুধুমাত্র আমাদের জীবনীশক্তি এবং প্রতিরোধী শক্তিকে সাহায্য করে, যার বিনিময়ে আমাদের শরীরকে অনেক মূল্য দিতে হয় এবং বলা বাহুল্য আমাদের পকেটও শীর্ণ হয়ে যায়। এছাড়া ওষুধগুলি শরীরে অনেক toxin ছড়িয়ে যায় যেগুলো শরীর আস্তে আস্তে পরিষ্কার করে নেয় কারণ পরিষ্কার না করতে পারলে শরীরে আবার নানান রকম পার্শ্বপ্রতিক্রিয়া উপসর্গের সৃষ্টি হয়।

একজন ডাক্তারবাবুর clinic বড় বড় করে একটা লেখা দেখেছিলাম "I serve and He cures". ডাক্তারবাবুকে প্রশ্ন করলাম এই 'He' টি কে? উত্তরে উনি বললেন 'He' টি হল রোগীর জীবনীশক্তি এবং তার প্রতিরোধী শক্তি এবং এই জীবনীশক্তি প্রতিরোধী শক্তিকে সতেজ করতে আমরা নানান ওষুধ বিধিনিষেধের মাধ্যমে চেষ্টা করি এই দুটিকে সতেজ করে ফেলতে তাতে রোগী সুস্থ হবেই নতুবা ওষুধের বাবাও কিছু করতে পারবে না। রোগীকে বাঁচানো যাবে না। লক্ষ টাকার injection আর লাভ হবেনা। অতএব একথা নিঃসেন্দহে বলা যায় যে যদি আমাদের জীবনীশক্তি প্রতিরোধী শক্তিকে সেবা দিয়ে সতেজ রাখতে পারি তখন ডাক্তার বা ওষুধের খুব একটা প্রয়োজন পড়বে না। তবে হ্যাঁ দৈনন্দিন জীবনে ডাক্তার বা ওষুধের কি কোনো প্রয়োজন নেই? নিশ্চয়ই আছে তার কারণ আমরা এত প্রদূষন, ভেজাল, tension নিয়ে বাস করি এবং শরীরের প্রতি যত্ন নিতে অবহেলা করি যে মাঝে মধ্যে ডাক্তার ওষুধের সাহায্য নিতেই হয়। গাড়ির গন্ডগোল হলে mechanic ডাকতেই হবে তবে গাড়ি ঠিক ভাবে রাখার দায়িত্ব আমাদের mechanic এর নয়।

অতএব জীবনের প্রথম সুত্র হল:-

ওষুধে অসুখ সারেনা, শরীরকে শুধুমাত্র অসুখ সারাতে সাহায্য করে।

 

দ্বিতীয় সুত্র:-

আমাদের জ্ঞান প্রয়োগের মধ্যে যত বেশী দুরত্ব বাড়বে ততই আমাদের নানান বিপদের সম্মুখীন হতে হবে। যেমন আমাদের এই জ্ঞানটুকু আছে যে তামাক সেবন ধূমপান শরীরের পক্ষে অত্যন্ত হানিকর অথচ প্রয়োগের সময় আমরা অনেকেই কোনো পরোয়াই করি না, নিয়মিত ব্যায়ামের দ্বারা শরীর স্বাস্থ্যের সেবা করা প্রয়োজন অথচ সেটি অনুপালনেই আমাদের অনীহা যা আমাদের রোগ ব্যাধিকে ডেকে আনে। এই হল আমাদের জ্ঞান প্রয়োগের দূরত্বের নিদর্শন।

 

তৃতীয় সুত্র:-

দৈনন্দিন জীবনে আমরা অনেকে জ্ঞান আহরণ করি সেগুলি যদি মাঝে মাঝে প্রশ্ন বা পরখ না করি তাহলে আমাদের অজান্তেই সেইসব জ্ঞান কখনও কখনও বিশ্বাস বা এক সংস্কারে পরিণত হবে। এই প্রসঙ্গে ছোট্ট একটা উদাহরণ দিয়ে শেষ করব। এক গৃহস্বামীর ঘরে একটি পোষা বেড়াল ছিল। যখনই ঘরে কোনো কর্মকাণ্ড হত বেড়ালটিকে একটি ঝুড়িতে চাপা দিয়ে রাখা হত যাতে সে কোনও খাদ্য বস্তু খেয়ে বা মুখ দিয়ে নষ্ট না করে ফেলে। গৃহস্বামীর এহেন কাজের উদ্দেশ্য নিয়ে তাঁর পরিবারের কেউ কখনও প্রশ্ন করেনি বরং পরবর্তী কালে যখন গৃহস্বামীর মৃত্যু হয় এটিকে একটি রীতি হিসেবে তারা মেনে নেয় এবং সেই প্রথাই গৃহে বরাবর পালন হতে থাকে। বংশপরম্পরায় তাঁর ছেলে, নাতি ইত্যাদি বাড়িতে পূজো বা কোনও শুভ কাজের আয়োজন হলে বাইরে থেকে একটি বেড়াল ধরে নিয়ে এসে তাকে ঝুড়ি চাপা দিয়ে রেখে কর্মকাণ্ড ইত্যাদি সারত এবং অতিথিদের প্রশ্নের উত্তরে বলত পুজোর বা শুভ কাজের মাহাত্ম্য এতে অনেক বৃদ্ধি পায় আর আমাদের গুরুজন পূর্বপুরুষেরাও এই প্রথাটি আজীবন পালন করে এসেছেন।

 

উপরিউক্ত সূত্রগুলি যদি আমরা আয়ত্তে রাখি অনুধাবন করি আমাদের জীবনকে মনে হয় অনেকটাই সরল করে নেওয়া সম্ভব।

 

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